कहानी

नाथ -सनाथ -अनाथ

साहित्य

संपादक

5/8/20261 min read

कहानी ------- नाथ --- ---- सनाथ ----- अनाथ--+++ये तीनों भाई थे । जैसे गांधी जी के तीन बंदर,।एक अंधा था,, एक लंगड़ा था,, एक बहरा था,। तीनों विवाहित थे ,।।तीनों में नहीं तो अलग अलग हो गए,, जैसे वर्तमान में भारत-- पाकिस्तान और बांग्लादेश हैं। तीनों में विकट दुश्मनी थी। तीनों एक दूसरे के ख़ून के प्यासे थे।। कारण वहीं जो सबको मालूम रहता है। यानि कि जमीनी विवाद,,।। तीनो में इतनी कट्टर दुश्मनी थीं,, कि एक दूसरे की शक्ल देखना तक नहीं,, पसंद करते थे। अतः नाथ गांव में रहने लगा। सनाथ और अनाथ रहने के लिए शहर निकल गए। नाथ बोले तो ब्रह्मा कह सकते हैं। सनाथ बोले तो आप विष्णु कह सकते हैं।। अनाथ वो बोले तो आप महेश कह सकते हैं।। मतलब तीनों एक दूसरे से कम नहीं थे। यहां तक कि बोल चाल तक भी ख़त्म हो गया था। पाँच छे बरस बाद तीनों में थोड़ी बात चीत शुरु हुई,,। नाथ ने सनाथ और अनाथ को बुलावा भेजा कि आओ अब समझौता कर लिया जाए,, नाथ की मंशा थीं कि सनाथ और अनाथ दोनों आए और उनको मौत की नींद सुला दे।। और इधर सनाथ और अनाथ भी गांव जाने का प्रोग्राम बनाने लगे,, चलो अबकी मुलाकात में नाथ को मौत की नींद सुला दिया जायेगा।। तीनों गांव के बाहर इकठ्ठा हुए,, नाथ अपने घर से ज़हर मिले लड्डू ले गया था,,, अनाथ और सन्नाथ को खिलाने के लिए,,, और इधर अनाथ और सन्नाथ भी जहर मिले खोवा की बर्फी ले गए थे,,,। तीनों ने आवभगत में खूब लडडू और बर्फी का सेवन किया,,।। तीनों सदा सदा के लिए मौत की नींद सो गये । ,,,,,,,,,, संपादक

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