गीत
शायद
साहित्य
संपादक
6/13/20261 min read


गीत ---- शायद ---- मेरे इश्क़ की मजमून को,, शायद पढ़ता नहीं कोई ।। यादों में मेरी,, रातों को,, तारे गिनता नहीं कोई ,,।। तुम्हारे बिना हम,,, जी नहीं सकते,,,, तुम्हारे बिना हम,,, मर नहीं सकते,,, तुम्हारे बिना हम,,, रह नहीं सकते,, तुम्हारे बिना ,, कुछ कर नहीं सकते,,,,,,, जाने मन,, खुलकर मेरे सामने,,, कहता नहीं कोई,,।।।मेरे इश्क़ की मजमून को पढ़ता नहीं कोई।।। दिल जार जार है शैदा,,, बड़ा बेकरार है,,,,, मेरी ही जीत है,,, मेरी ही हार है,,।। हकीकत है लोगों,, आजकल दिल में रहता नहीं कोई ।।। मेरे इश्क़ की मजमून को शायद पढ़ता नहीं कोई।।। हर तरफ़ भीड़ है ,, फ़िर भी,, तन्हाई है ।। इस दिल की,, दुश्मन,, मेरी परछाई है ।।। आज दौरे जिन्दगी में,,, साथ साथ चलता नहीं कोई।।। मेरे इश्क़ की मजमून को,, शायद पढ़ता नहीं कोई।।।। संपादक।।।।।।
