जापानी गुड़िया

प्रेम विवशतः

साहित्य

संपादक

4/27/20261 min read

छंद मुक्त कविता - जापानी गुड़िया - लिखना कहां से शुरू करूं,,, और कहां पे ख़त्म करूं,, जिन्दगी भर रोता रहूँ,,, और याद में तेरे आँखें नम करूं,,, मेरी हँसी है, तुझसे,,, मेरी खुशी है तुझसे,,,मेरा खिलौना तू,,,मेरा ओढ़ना तू,,, मेरा,, बिछौना तू,,, ए जापानी गुड़िया तू,, प्यार की पुड़िया तू,,ये प्यार की पुड़िया,, जाने कब तू खुलेगी,,, बेखबर अंजाना मैं,, तेरा दीवाना मैं,,, जाने कब तू,, मिलेगी,, बुद्धम शरडम गच्छामि,,,ॐ नवम नमामि,,।।।।

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राजेश कुमार कर्मपथी उर्फ़ सम्राट शैदा सुलतान पूरी

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