चांदनी

भक्ति मय कविता

साहित्य

संपादक

5/9/20261 min read

छंद मुक्त कविता---,,, नवदुर्गे,,नवज्योति पुंज,,, नवरात्रि की चांदनी,,,।।। ममता मय प्रवाह से निर्मित,, मधुर राग रागिनी।।। शिव की प्राण प्रिय तू,,,, शिव का रंग रूप तू ,,,, दम दम दमके तू,, शिव शिव के मन की दामिनी,,।। नवदुर्गे,, नवज्योति पुंज,, नवरात्रि की चांदनी,,,।।। ममता मई तू,, करुणा मई तू,,, मैं हूँ अज्ञानी,, विद्या मई तू,,,, सारा जग है पापी,, बस इक तू ही पाप नासिनी,,,।।। नवदुर्गे,,नव ज्योति पुंज,, नवरात्रि की चांदनी।।। चाँद,, सूरज और नदियां,,, तेरी आरती उतारे,,।। भीख मांगे तुझसे,,, चारों दिशाओं के किनारे,,,।। तू है कर्मों की दाता,,।। तू ही भाग्य विधाता,, तुझसे बाजे ,,शिव का डमरु,, शिव के मन की कामिनी,,।।। नव दुर्गे ,, नवज्योति पुंज,,, नवरात्रि की चांदनी,,।।। ,,,,,,,,,,,, संपादक

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राजेश कुमार कर्मपथी उर्फ़ सम्राट शैदा सुलतान पूरी

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