धोखा,,,,,,,,,,,,,,,
reality
Editor
5/6/20261 min read


छंद मुक्त कविता ----धोखा ------- कुछ लोग तो,, जिन्दगी में ,, कभी,, कभी,, धोखा खाते है,,हम ऐसे दीवाने हैं,, कि रोज़ धोखा,,, खाते हैं,,हर पल,,, बस यही,,, सोचते हैं,, कि आज जरूर,,, हमे,,,, सच्चा,, प्यार मिलेगा,,,पर मिलता है,, ठेंगा,, रोजाना,,,जो लोग,, हमे,,, दिखा ,,,, देते है,,,,।।हम रोज़,,, अपनी किस्मत को,,, कोसते रह जाते हैं,,,,,,, किस्मत,, धत्त तेरी की,,, तू कितनी ,, बकवास है,,, सबकी है,, नगर मेरी नहीं है,,, हाय ,,, मेरी जिन्दगी,,तू कितनी,,, तन्हा है,,, कितनी अकेली है,,,।।।
