गीत
जिन्दगी
साहित्य
संपादक
6/8/20261 min read


गीत ---- जिन्दगी ----- कभी पाना तो कभी खोना है जिन्दगी।। कभी हँसना तो कभी रोना है जिन्दगी।। अंखिया मेरी,,तेरी दरस को प्यासी है,,, कैसे कहूँ,,,ये अंखिया बड़ी रुआंसी है,, कभी जगना तो कभी सोना है जिन्दगी।। कभी पाना तो कभी खोना है जिन्दगी।। ज़हर एक दवाई है,,, भीड़ में तन्हाई है,,,एक तरफ़ गड्ढा तो दूसरी तरफ़ खाई है,,, कभी जादू तो कभी टोना है जिन्दगी।। कभी पाना तो कभी खोना है जिन्दगी।। अब मौत के घर से,,मेरे बचपन को बुलावा आया,,, जाने कब जवानी आयी,,,जाने कब बुढ़ापा आया,,,कभी बाबू तो कभी सोना है जिन्दगी,,।। कभी पाना तो कभी खोना है जिन्दगी।।।
