नामुमकिन
कविता
साहित्य
सम्पादक
6/3/20261 min read


कविता ---- नामुमकिन ---- आपके हम है,, आप हमारे है,,,।। दुनियां में मग़र,,, हम बेसहारे है ,,।। खुदा को गवारा नहीं,, हमारा मिलन,,, मुश्किल नहीं,, नामुमकिन है,, हमारा मिलन,,, हम दोनों,,, नदी के दो किनारे है,,।। आपके हम है,,, आप हमारे है,,।। हम भी किसी के मुकद्दर है,,, आप भी किसी के मुकद्दर हो,,, हम भी जहाँ समन्दर है ,,,,।। आप भी जहाँ में समन्दर हो,,,।। मगर प्यासे है,,, वक्त के मारे है ,,,।। आपके हम है,,, आप हमारे है,,।। चाहकर भी,, हम कभी मिल नहीं सकते,,,।। हम वो फूल,, है,,।। कि कभी खिल नहीं सकते,,।।। कुदरत के खेल बड़े न्यारे हैं।।। आपके हम है,,,आप हमारे है,,,,।।।।
