ग़ज़ल
जिन्दगी में सब कुछ हासिल नही होता।।।।
साहित्य
संपादक
6/11/20261 min read


ग़ज़ल ----- जिन्दगी में सब कुछ हासिल नही होता।। आख़िरी दम तक,, हर मंज़िल नहीं होता।। बेवफा की तलाश जारी शैदा,,, प्यार अंधा, मगर,, संग दिल नहीं होता।। जिन्दगी में सब कुछ हासिल नही होता।।। लोग मरते , शायद,, बीच धारे में ही,,, मौत का सबब,,,कभी साहिल नहीं होता।। जिन्दगी में सब कुछ हासिल नही होता।। रोजगार तमाम है,, अभी भी इस दुनिया में,,,,,, मगर ,, हर शख्स,, इसके काबिल नहीं होता।।। जिन्दगी में सब कुछ हासिल नही होता।। बेगुनाह है कैदी,,, जेल में अक्सर ही,,,, बन्द हर मुजरिम,, कातिल नहीं होता।।। जिन्दगी में सब कुछ हासिल नही होता।।।
