कोई ,,,,,,,,,,,,,,

कोई पागल होगा

साहित्य

संपादक

5/15/20261 min read

छंद मुक्त कविता -- कोई पागल होगा ---- जली हूँ,, जली हूँ,, रात भर मै जली हूँ,, मेरे दिया की रोशनी में,,,, रात भर पढ़ता रहा कोई,,, मेरे अक्स को,,, मेरी जिन्दगी को,, मै सोती रही,, उसको जगाती रही,,, हा,, कोई लिखता रहा,,,मेरे भविष्य को,,, मेरे सपनों को,,, मै नहीं जानती,,, कौन है वो,,, मै जानना भी नहीं चाहती कौन है वो,,, मेरे सपने हजारों है,,, हजारों सपनों में कोई होगा,,, जो अपने किसी,, सपने को सोच रहा होगा,,, लिख रहा होगा,,, पढ़ रहा होगा,,, मुझे क्या,,, उसकी मरजी,,, वो जाने,,, मेरे हिसाब से कोई कवि होगा,,,, लेखक होगा,, या हो ना हो,, कोई पागल होगा,, हा,, कोई ,,, पागल होगा,, जली हूँ,, जली हूँ,, रात भर मै जली हूँ,,, अंजली हूँ,, अंजली हूँ,,, हा मै अंजली हूँ,,,मन चली हूँ,,, मन चली हूँ,,, हा मै मनचली हूँ,,, लोग कहते है,,, पुरुष पुरातन की बधू,,, क्यों ना चंचला होय,,,,,।।।।।।।।।।।। संपादक

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राजेश कुमार कर्मपथी उर्फ़ सम्राट शैदा सुलतान पूरी

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