औकात ------------

डॉलर वाला ----

संपादक

5/6/20261 min read

छंद मुक्त कविता --- जैसे --- तैसे --- जानम,,, मुबारक हो तुम्हे,, डॉलर वाला,,,मेरी औकात तो,,, एक रूपये के बराबार भी,,नहीं है,,बस चवन्नी,,, अठन्नी,,, में जैसे तैसे मेरी जिन्दगी कट रही है --------