गरीबी+++---+-++++++------
वर्तमान स्थिति का चित्रण
साहित्य
5/5/20261 min read


छंद मुक्त कविता --- हृदय की वेदना जब प्रस्फुटित होती है,,,। तब पुष्प खिलकर बिखरते है,, और नयनों से नीर,,, खुलकर,, झरते है ,, ।।।नदिया और समन्दर आपस में ,,युद्ध करते हैं,,।। आसमान से बिजली गिरती है,,, बादल अकस्मात फटते है,,,।। हृदय तो हृदय है,, क्या करे बेचारा,,,,, आदमी मर जाता है,, जिसे हृदयाघात कहते है ,,, ग़रीब भूखों मरते है,,और अमीर,, दिन को रात कहते है,, ।। गरीबों की जिन्दगी,,,हाय तौबा ,,, में गुजरती है,,, अमीरों की जुबानी,,, जिसे बरसात कहते है ,,,।।।।।। धन्यवाद,,, संपादक
