प्यार की मूरत

संयोग रस

साहित्य

संपादक

5/9/20261 min read

छंद मुक्त कविता --- ए प्यार की मूरत,, दिल में बिठाकर,, पूजना चाहता हूँ।।। जिन्दगी तेरे बारे में,, बहुत कुछ सोचना चाहता हूँ,,।। क्या बनोगी मेरी जिन्दगी,,,, तुझसे पूछना चाहता हूँ,,।। आंखों में आंखे डाल कर,,, तुझमें डूबना चाहता हूँ,,।।। तेरे गोरे गोरे गाल,,जिसे चूमना चाहता हूँ,,।। होठों की लाली,, रख के होठों पे होंठ,, चूसना चाहता हूँ,,।।। तेरे काले - भूरे बाल पे,,,, हाथ फेरना चाहता हूँ,,।। तू डाली है गुलाब की,,, जिसे सूंघना चाहता हूँ,,।।। तेरे मेरे बीच की शरहद,, तोड़ना चाहता हूँ,,,।।। जिन्दगी की हर जंग,,, जीतना चाहता हूँ,,।। जिन्दगी तुझे कैसे बताऊं,,, तुझसे क्या क्या चाहता हूँ,,,।।।।।।।।।।।।।।।।।। संपादक

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राजेश कुमार कर्मपथी उर्फ़ सम्राट शैदा सुलतान पूरी

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