डियर डॉक्टर्स

डॉक्टर और मरीज़

साहित्य

संपादक

5/20/20261 min read

छंद मुक्त कविता -- डियर डॉक्टर्स ----- डियर डॉक्टर्स,,आप कितने अच्छे है,,, आप कितने बुरे है,,, जग ज़ाहिर है,,,।। डियर डॉक्टर्स,,, आप ही है न,,,जो एक रुपया कम होने पर दवाई नहीं देते है ।। हा भैया,,,दादा न भैया,,, सबसे बड़ा रूपया,,।। डियर डॉक्टर्स आप ही हो न ,, जब लूटने का जुगाड़ खत्म हो जाता है,,,तो, रेफर कर देते हो,,, का करे साहब,,, मौत जो इनके बस में नहीं है ,, रेफर तो मांगता है,,,। जब तक शरीर में जान रहती है,,, रुपया चूसते रहते है,, जैसे आम आदमी,,, पका आम चूसते हैं,,।। आप कहेंगे,, सरकारी अस्पताल है न ,, सरकारी डॉक्टर हैं न,,, हा हैं,,, जिन्दा मरीज़ ले जाते है,, और मौत का कफ़न पहना कर घर ले आते है,, जय हो डियर डॉक्टर्स की,,,जय भारत भूमि की,,, संपादक

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राजेश कुमार कर्मपथी उर्फ़ सम्राट शैदा सुलतान पूरी

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